आदर्शों की डोर पकड़ अपना बेड़ा पार

आदर्शों की डोर पकड़ अपना बेड़ा पार

सीतामढ़ी।पर्व-त्योहारकामौसमबीतगया।शहरफिरसेअपनीसामान्यदिनचर्यामेंजीनेलगा।लेकिनआनेदो-तीनसालमेंहोनेवालेराजनीतिकमहापर्वकोलेमेलासजानेवालेअभीसेअपनेतंबुओंकाखूंटामजबूतकरनेमेंजुटगएहैं।इसीसेपर्व-त्योहारबीतनेकेबादभीशहरकोसांसलेनेकीफुर्सतनहींदिखरहीहै।ट्रैफिककीभारसेहरदिनहांफताशहररोज-रोजकेजलसा-जुलूसोंसेबेदमहोनेलगाहै।समस्याओंकेनिदानकेलिएआवाजउठानेवालेखुदहरदिनसमस्याबनानेपरउतारूहैं।अपने-अपनेजमातमेंअपनीउपयोगितासिद्धकरनेएवंअपनीशक्तिकाअहसासकरानेकादौरभीचलरहाहै।इसकेलिएमहापुरुषोंकेआदर्शोंकोडोरसहाराबनरहाहै।शायदइसीआदर्शोंकीडोरपकड़उनकाबेड़ापारहोजाए।लेकिनमहापुरुषोंकेआदर्शोंकोआत्मसातकरनेउनकेव्यक्तित्वकेबारेमेंसमझने-बूझनेकीइच्छारखनेवालोंतबजोरोंकाझटकालगताहैजबऐसीजगहोंपरमहापुरुषोंकेनामपरभीड़तोजुटालीजातीहैलेकिनकुछहीपलमेंपूरापरि²श्यहीबदलजाताहै।महापुरुषएवंउनकेआदर्शपोस्टरतकहीसीमितरहजातेहैंऔरशुरूहोजाताहै।राजनीतिकमेंअपनीउपस्थितिकीबदौलतहिस्सेदारीकीमांगऔरउपेक्षाकाराग।इसतरहकीखेमाबाजीहरजगह-हरमैदानमेंइनदिनोंदिखरहीहै।राजनीतिककेमहापर्वकेपूर्वइसअनुष्ठानमेंहरवहतबकालगाहैजिन्हेंआगेफतहकीआसदिखरहीहै।हालांकिअभीदोसेतीनसालकेरास्तेमेंकईपड़ावआनेबाकीहै।कौनकिसकासाथीबनजाएगाऔरकिसकेसामनेखमठोंककरखड़ाहोजाएगा,अभीकहानहींजासकताहै।लेकिनपहलेसेतंदुरूस्तीकायमरहेतोकिसीभीअखाड़ेसेबुलावाआसकताहै।इसकीतैयारीमेंअभीसेजुटजानादूर²ष्टिऔरपक्काइरादाकेहिसाबसेतोठीकहै।लेकिनआमजनक्याकरेवेइतनाजल्दीनअपनेआदर्शकोबदलपातेहैंऔरनअपनेविचारको।उसीसेतोशायदआमजनहरकिसीकेआदर्शोंकीबातकोबड़ेविश्वासकेसाथआत्मसातकरनेकोतैयाररहतेहैं।लेकिनतबवहठगामहसूसकरताहैजबदेखताहैकिकुछदिनमेंउसकेरहनुमाकाहीआदर्शबदलचुकाहै।खैर,आमजनकोतोमहापुरुषोंकेआदर्शोंकोकेवलआत्मसातकरनाहैलेकिनइनलोगोंकोआदर्शोंकीडोरपकड़अपनाबेड़ापारकरनाहै।